हाल ही
में बारहवीं के परिणाम घोषित हुए हैं । कई अभिभावक अपने बच्चों के रिजल्ट शेयर करते
हुए शुभकामनाएँ और बधाईयाँ आमंत्रित कर रहे हैं । अपने बच्चों के रिजल्ट की ख़ुशी
का सार्वजनिक उत्सव मना रहे हैं ।
बच्चों के अच्छे रिजल्ट पर खुश होना किसी भी तरह से बुरा नहीं है, लेकिन यह सब करते हुए इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि यही रिजल्ट कई
बच्चों और अभिभावकों के लिए दुःख और अवसाद का कारण हो सकता है ।
अपनी ख़ुशी में कम से कम उस संस्कृति को बढ़ावा न दें, जो बच्चों को अधिक से अधिक अंक प्रतिशत और
ग्रेड हासिल करने की घुड़-दौड़ का हिस्सा बना देना चाहती है ।
कोई भी अकादमिक रिजल्ट किसी की योग्यता
को तय करने का मानक न आज तक हुआ है न कभी हो सकता है । ऐसे उदाहरण भरे पड़े हैं ।
ज़िन्दगी
बहुत खूबसूरत है, बेहद हसीन है । यह तो ताउम्र हमारी परीक्षाएं लेती
रहती है, इसलिए समझदार लोग अपने बच्चों को समझायेंगे कि 'ज़िन्दगी बारहवीं की मार्कशीट नहीं है' !!

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