श्याम
बेनेगल ने अपने एक साक्षात्कार में बताया है कि शबाना आज़मी और स्मिता पाटिल दोनों
के बीच एक प्रतिस्पर्धा रहा करती थी। उनके अनुसार शबाना आज़मी ने चूँकि अभिनय का
प्रशिक्षण हासिल किया था और स्मिता पाटिल ने नहीं, इसलिए इस बात का एक हीनताबोध स्मिता पाटिल के मन में था। लेकिन हिंदी
सिनेमा के दर्शकों ने एक दौर में देखा और अब तक देखकर यह महसूस कर रहे हैं कि,
स्मिता पाटिल की अदाकारी में कितनी अधिक विविधता और कितनी अधिक
सहजता है।
उन्हें
किसी तरह के प्रशिक्षण की आवश्यकता थी, ऐसा ख़याल
किसी दर्शक या किसी आलोचक के मन में शायद ही कभी आया हो! बल्कि यह कहना अधिक सही
होगा कि स्मिता अपने आप में अभिनय का एक स्कूल हैं, जिनसे कई
लोग कई चीज़ें सीखते हैं/ सीख सकते हैं। मैं ऐसा स्मिता की किसी से तुलना करने के
ख़याल से नहीं कह रही हूँ। शबाना आज़मी भी बहुत उम्दा अभिनेत्री हैं और उनकी अपनी
विशेषताएँ हैं। लेकिन जिस बात का पता स्मिता पाटिल को अपने जीवन काल में नहीं चला
होगा, उसे शबाना आज़मी ने बहुत बाद में अपने एक इंटरव्यू में
स्वीकारा है कि, स्मिता का अभिनय उनके लिए ईर्ष्या का विषय
हुआ करता था। मेरे ख़याल से ये स्वीकारोक्ति भी अभिनय के प्रति खुद शबाना के समर्पण
और अच्छे अभिनय के प्रति उनके अगाध सम्मान को ही प्रदर्शित करती है।
स्मिता
को बहुत कम उम्र मिली, लेकिन उतनी ही उम्र में
उन्होंने भारतीय विशेषकर हिंदी सिनेमा को समृद्ध करने में जो योगदान दिया है,
वह अविस्मरणीय है। आज स्मिता की पुण्यतिथि है। सादर नमन।
#SmitaPatil #ShabanaAzmi #ShyamBenegal #DeathAnniversaryofSmitaPatil


No comments:
Post a Comment